किसी कार का फेसलिफ्ट या फिर नया मॉडल लॉन्‍च हो जाता है, तो कई बार कार डीलर उस मॉडल की टेस्‍ट ड्राइव के लिए यूज की जा रही डेमो कार की वॉशिंग और छोटे मोटे रिपेयर कर कस्‍टमर को बिना बताए बेच देते हैं।

कुछ गाडिया ऐंसी भी होती है जो ट्रांसपोर्टेशन के दौरान या फिर किसी और तरह से डेमेज हो जाती है लेकिन कार पर लगे डेन्‍ट को रिपेयर कर दिया जाता है और कस्‍टमर को बिना बताए गाड़ी सेल कर दी जाती है।

डिमांड ज्‍यादा न होने से कार लंबे समय तक स्‍टॉकयार्ड में खड़ी रहती है, जिससे उसकी बॉडी में जंग लगना शुरू हो जाता है और टायर फ्लेट होने लगते हैं, लेकिन बेचने से पहले इन सब खामियों को छुपा दिया जाता है।

कई गाडियों की वेटिंग ज्‍यादा होती है। ऐंसे में डिमांड पूरी करने के लिए प्रोडक्‍शन यूनिट पर प्रेशर बन जाता है और वो जल्‍दबाजी में कार में कुछ न कुछ कमिया रह जाती है। जिसे बाद में रिपेयर करके कस्‍टमर को दे दिया जाता है।

किसी भी गाड़ी को बेचने से पहले प्री डिलीवरी इंस्पेक्शन यानी PDI किया जाता है। यह एक प्रोसेस है, जिसमें कार की डिलीवरी करने से पहले उसके इंस्पेक्शन की फैसिलिटी मिलीती। इसमें कार के इंटीरियर, एक्सटीरियर, इंजन और सभी फीचर को चेक किया जाता है कि वे ठीक से काम कर रहे हैं या नहीं। PDI दो तरीके से किया जाता है।

1. गाड़ी की डिलीवरी से पहले डीलरशिप खुद PDI करता है। पूरी तरह से चेक करने के बाद कार पर PDI का बेज लगा दिया जाता है, जिससे पता चलता है कि कार डिलीवरी के लिए तैयार है। 2. डीलरशिप से कार लेने से पहले कस्टमर भी कार की PDI कर सकता है और अपने लेवल पर हर एक चीज को चेक कर सकता है।

कार डीलर को पहले पता होता है कि कार में क्या प्रोब्लम है और डिलीवरी से पहले किस तरह कस्टमर से उसे छुपाना है। इसलिए गाड़ी आपके नाम पर रजिस्टर होने से पहले ही कार का PDI कर लेना चाहिए। कार के सभी कागजों पर साइन करने से पहले आप डीलर से कार की PDI करवाने के लिए कहें।